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भारत में धर्म : एक गहन दार्शनिक विवेचन

भारत की सांस्कृतिक चेतना का यदि कोई मूलाधार है, तो वह है धर्म। भारतीय परंपरा में धर्म मात्र religion या पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि वह शाश्वत व्यवस्था है जो व्यक्ति, समाज और सम्पूर्ण जगत को धारण करती है।

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भारतीय समाज में धर्म का महत्त्व

भारत को यदि कोई “अक्षुण्ण और जीवित सभ्यता” बनाकर आज तक खड़ा रखे हुए है, तो उसका आधार केवल आर्थिक समृद्धि या राजनैतिक शक्ति नहीं है। वह आधार है — धर्म। धर्म वह है जो हमें “मानव” बनाता है।

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सनातन धर्म : भारतीय संस्कृति का शाश्वत जीवनदर्शन

भारतीय सभ्यता का मूल आधार धर्म है। लेकिन जब हम धर्म कहते हैं, तो यह शब्द संकीर्ण अर्थ में केवल धर्म नहीं है। भारत में धर्म का अर्थ है

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भारतीय सभ्यता में मंदिरों का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व

भारतीय संस्कृति के इतिहास में मंदिर केवल धार्मिक आस्था का स्थल नहीं रहे, बल्कि वे समाज, संस्कृति, कला, शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण के जीवन-केंद्र रहे हैं।

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